श्री उमिया माताजी सेवा ट्रस्ट, उमियाधाम करोंदिया माताजी की अखंड ज्योत व मंदिर का इतिहास जगत कल्याणी, जगत जननी, पाटीदार समाज कुलदेवी माँ उमिया के आशीर्वाद से एक धर्म प्रचारक संत परमहंस श्री 108 श्री पुस्करानंद जी स्वामी ग्राम करोंदिया में आये, उनके द्वारा गाँव में श्री मद भागवत कथा, सत्संग, प्रवचन किया गया I संत जी की प्रेरणा से कुलदेवी माँ श्री उमिया माताजी की दिव्य अखंड ज्योति उंझा गुजरात से 42 पद यात्रियों द्वारा 650 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय कर तय दिनांक 18 अप्रेल 1986 रामनवमी के दिन सर्वप्रथम मध्यप्रदेश में लाई गई I

मध्यप्रदेश में कुलदेवी माँ उमिया की दिव्य अखंड ज्योति लाने के बाद श्री उमिया माताजी संस्थान,उंझा के अध्यक्ष महोदय, पदाधिकारीगण एवं गणमान्य समाजजनो की सामाजिक यात्राये प्रारम्भ हुई एवं उनके मार्गदर्शन में निमाड़ पाटीदार समाज ने तेजी से प्रगति करते हुए विकास की और अग्रसर हुआ I उंझा से लाई गई दिव्य अखंड ज्योति की ग्रामजनों व समाजजनों द्वारा बड़े भक्ति भाव से नियमित पूजा होती रही I 15 सितम्बर 1987 को एक ट्रस्ट का निर्माण किया गया I उंझा संस्थान के मार्गदर्शन में भूमि का चयन कर मंदिर निर्माण की योजना बनाई गईI

दिनांक 7 जनवरी 1990 को निमाड़ पाटीदार समाज ने मंदिर ट्रस्ट का विस्तार करके भव्य मंदिर निर्माण की योजना का शुभ संकल्प लिया जिसके फलस्वरूप 8 मार्च 1990 को मंदिर निर्माण हेतु विशाल जन समूह के बिच भूमि पूजन समारोह संपन्न हुआ I मंदिर निर्माण कार्य का ठेका एक शिल्पकार को तय कर दिनांक 11 जून 1990 के दिन शुभ मुहूर्त में विद्वान पंडितो द्वारा मंदिर की नीव में 9 प्रकार की शिलाओ का 9 यजमानो द्वारा पूजन कर मंदिर निर्माण कार्य शुरू किया गया I मंदिर निर्माण पूर्णरूप से शास्त्रोक्त विधि से बनाया गया, जिसमे बांस, पहाडपुर का लाल पत्थर, हिम्मतनगर गुजरात का सफेद पत्थर, अम्बाजी, कांकरोली, राजनगर व मकराना का मार्बल लगाया गया I 4 वर्षो में निर्माण कार्य पूर्ण हुआ I मंदिर निर्माण में निमाड़ पाटीदार समाज के प्रत्येक परिवार व मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलो से तथा गुजरात के कई दान दाताओ से दान प्राप्त हुआ है I मंदिर निर्माण में कुल 17 लाख रुपये लागत आई I

प्राण-प्रतिष्ठा श्री उमिया माताजी संस्थान, उंझा गुजरात के मार्गदर्शन में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव तय किया गया, महोत्सव की भव्य पैमाने पर तैयारियां हुई, सम्पूर्ण मध्यप्रदेश, गुजरात, व अन्य प्रदेशो में निमंत्रण भेजे गए, धार्मिक एवं सामाजिक जाग्रति हेतु करोंदिया में ज्योति रथ का निर्माण कर निमाड़ के 125 गाँवो में रथ का भ्रमण कराया गया I ज्योति रथ का सभी गाँवो में अभूतपूर्व स्वागत-सत्कार हुआ, क्षेत्र में माताजी के प्रति लगाव होकर भक्ति भाव जाग्रत हुआ, समाजजनो में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रति उत्साह चरम पर था I ज्योति रथ यात्रा 1 से 18 फरवरी को 18 दिन की यात्रा ओम्कारेश्वर से महेश्वर तक पूर्ण हुई I

दिनांक 20 फरवरी 1994 के दिन पुण्य सलिला माँ नर्मदा के पावन तट पर माताजी की मूर्तियों का जलाभिषेक करके 1001 कन्याओ द्वारा मंगल कलश यात्रा प्रारम्भ हुई, यह शोभा यात्रा 7-8 किलोमीटर लम्बी एक विशाल शोभा यात्रा में बदल गई, चालित यात्रा में चालित सुन्दर झांकिया आकर्षण का केंद्र रही, मुख्य मेहमानों को हाथियों व घोड़ो पर बैठाया गया, पैदल व असख्य वाहनों से भक्त लोग माताजी के जयकारे लगते चल रहे थे I दिनांक 20 से 24 फरवरी तक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव सफलता पूर्वक संपन्न हुआ, जिसमे सह्त्रचंडी यज्ञ, भागवत कथा, गरबा रास, भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए I पांच दिनों तक लगातार विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, 24 फरवरी 1994 को सुबह 7:30 बजे माताजी की प्राण-प्रतिष्ठा विधि पूर्वक निर्विघ्न संपन्न हुई I इस अवसर पर ढोल-ताशे बजाये गये, आतिशबाजी हुई, विशेष विमान से पुष्प वर्षा की गई, गगनभेदी जयकारे लगाये गए, कुल मिलकर द्रश्य ऐसा लग रहा था मानो देवता स्वंय पुष्प वर्षा कर रहे हो I इस शुभ घडी में भक्तगण नाचने लगे, झुमने लगे, भाव-विभोर हुए, प्रेमाश्रुओ की धराये बहने लगी I प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में लगभग पांच लाख भक्तो ने भाग लिया I प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम अदभुत, अद्वितीय, अनुपम, अविस्मर्णीय रहा I